गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही परम्परा का निर्वहन करते हुए बतौर पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति के अवसर पर गुरुवार 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त में भोर में 4 बजे बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई. इसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ,
गोरखपुर में कल लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा गोरखनाथ को लाखों की संख्या में आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाई. प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया. आज भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु गुरु गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने के लिए आए हैं.
जगत पिता सूर्य इस चराचर जगत की आत्मा हैं.सनातन हिंदू परंपरा में सभी पुण्य कार्य आज से प्रारंभ हो जाएंगे
सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य देव का भ्रमण संक्रांति कहलाती है धनु राशि से हम मकर राशि में जब भगवान सूर्य का संक्रमण होता है तो यह कल मकर संक्रांति कहलाता है
उत्तरायण का समय दिन बाद और रात्रि छोटी होती है.
इस समय को जीवन में कितना महत्वपूर्ण है इस पर्व के माध्यम से अंदाजा लगा सकते हैं यह भारत में अलग-अलग नाम से अलग-अलग राज्यों में आयोजित होता है.पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में पोंगल तीलुआ संक्रांति खिचड़ी और मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है पंजाब में लोहड़ी यह मकर संक्रांति के ही अलग-अलग रूप है. गोरखपुर में शिव अवतार बाबा गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी चढ़ाने के लिए कल से इलाकों की संख्या में श्रद्धालु गोरखनाथ मंदिर में लगातार आ रहे हैं और पवित्र खिचड़ी चढ़ा रहे हैं.देश अवसर पर सभी श्रद्धालु जनों का हृदय से स्वागत करते हैं.देश और प्रदेशवासियों के साथ देश और दुनिया के अलग-अलग श्रद्धा स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को अभिनंदन करते हुए मकर संक्रांति की मंगलमय शुभकामनाएं सभी के प्रति व्यक्त करता हूं.
मुहूर्त कल सांयकाल से ही प्रारंभ हो चुका है लेकिन हमारे सनातन धर्म की परंपरा में भर के शुभ लग्न के साथ ब्रह्म मुहूर्त से मकर संक्रांति में खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो चुका है.
आज भोर में 4:00 बजे बाबा गोरखनाथ की विशिष्ट पूजा संपन्न हुई है इसके बाद से ब्रह्म मुहूर्त में खिचड़ी चढ़ाने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिया गया है.प्रयागराज में गंगा जमुना सरस्वती माता की आशीर्वाद से पुण्य काल में लोग आस्था की डुबकी लगा रहे हैं.
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