उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) के तत्वावधान में आज जिला कारागार, गोरखपुर का एक उच्चस्तरीय विधिक टीम द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का नेतृत्व डॉ. मधु कालिया, सदस्य सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया। उनके साथ सुचिता चौरसिया, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), गोरखपुर भी मौजूद रहीं। निरीक्षण के दौरान विधिक सहायता प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के अधिकारियों की पूरी टीम उपस्थित रही, जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल थे, जिसमें बृजेश सिंह, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, भगत गौर, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, हबीब जफर, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल, संजय कुंवर निगम, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल, अरविंद सिंह, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल उपस्थित थे। सदस्य सचिव ने जेल की बैरकों में जाकर महिला और पुरुष बंदियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने विशेष रूप से उन बंदियों की समस्याओं को सुना जो लंबे समय से विचाराधीन हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बंदियों के पास पैरवी के लिए निजी अधिवक्ता नहीं हैं, उन्हें तत्काल लीगल एड डिफेंस काउंसिल के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। निरीक्षण के दौरान सदस्य सचिव ने जेल प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि ऐसे बंदियों की सूची तैयार की जाए जिनकी जमानत अदालत से मंजूर हो चुकी है, लेकिन मुचलका न भर पाने या किसी तकनीकी कारण से वे अभी भी जेल में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विधिक सेवा प्राधिकरण त्वरित हस्तक्षेप कर उनकी रिहाई सुनिश्चित करेगा। टीम ने जेल के अस्पताल और रसोई घर का भी निरीक्षण किया। डॉ. कालिया ने महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने जेल डिस्पेंसरी में दवाइयों की उपलब्धता और डॉक्टरों की उपस्थिति की भी जांच की। बैरक एवं महिला वाडर्स टीम ने पुरुष और महिला बैरकों में जाकर बंदियों के रहन-सहन की स्थिति देखी। डॉ. कालिया ने महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से सुना। बंदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच की गई। सदस्य सचिव ने पाकशाला में स्वच्छता मानकों को और बेहतर करने के निर्देश दिए। बीमार बंदियों के उपचार और उन्हें दी जा रही कानूनी सहायता की स्थिति की समीक्षा की गई। निरीक्षण दल में चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल बृजेश सिंह के साथ डिप्टी चीफ और असिस्टेंट काउंसिल के सदस्य भी शामिल रहे। दल ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया। विशेष रूप से उन बंदियों की पहचान की गई जिनके पास पैरवी के लिए निजी वकील नहीं हैं, ताकि उन्हें सरकारी खर्च पर विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सचिव सुचिता चौरसिया ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, जैसे स्पीडी ट्रायल और मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि की टीम जेल में नियमित रूप से आकर बंदियों के मुकदमों की प्रगति की निगरानी करेगी। निरीक्षण के अंत में डॉ. मधु कालिया ने जेल प्रशासन और टीम के साथ एक बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि सुधार लाना भी है। उन्होंने चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री बृजेश सिंह को निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र बंदी को प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व मिले, ताकि कोई भी व्यक्ति गरीबी या अज्ञानता के कारण न्याय से वंचित न रहे।
निरीक्षण के दौरान इस कारागार पर जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय, जेलर श्री अरूण कुमार कुशवाहा, एवं वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ विनय कुमार राय तथा उपजेलर श्री आदित्य कुमार व श्रीमती कृष्णा कुमारी तथा फार्मासिस्ट शेष कुमार शर्मा एवं अन्य कारागार कर्मी उपस्थित रहे।
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