दिनांक 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को समर्पित वीर रस काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सर्वेश चन्द्र शुक्ल के संचालन में हुआ। अपने उद्घाटन वक्तव्य में उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थापना, उसके ऐतिहासिक विकास क्रम तथा समय-समय पर परिवर्तित होती राजधानियों की जानकारी उपस्थित जनसमूह के समक्ष प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी द्वारा किया गया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने उत्तर प्रदेश की स्थापना के ऐतिहासिक विकास क्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्माण, प्रशासनिक पुनर्गठन एवं सामाजिक-राजनीतिक विकास से जुड़े अनेक पहलुओं पर अभी भी महत्वपूर्ण शोध-अंतराल (Research Gaps) विद्यमान हैं।
प्रो. तिवारी जी ने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश की स्थापना से जुड़े दस्तावेज़ों, जनआंदोलनों, क्षेत्रीय अस्मिताओं एवं ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कर नई शोध दिशाओं को विकसित करें, जिससे राज्य के इतिहास को अधिक समग्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके।
हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिषेक शुक्ला ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश को क्रांतिकारी आंदोलनों का केंद्र बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सर्वाधिक क्रांतिकारी गतिविधियाँ इसी भूमि पर हुईं, जहाँ अनेकों युवाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।
समाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनीष पाण्डेय ने युवाओं को समाज से जोड़ते हुए वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चित्रलेखा उपन्यास के माध्यम से समाज की संरचना और उसके निर्माण की प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया।
इसके पश्चात जावेद खान को काव्य गोष्ठी के मंच संचालन हेतु आमंत्रित किया गया। काव्य पाठ की शुरुआत गणेश पाठक (शोध छात्र, राजनीति विज्ञान) द्वारा की गई, जिन्होंने क्रांतिकारी आंदोलनों पर आधारित अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं को उत्साहित कर दिया।
शोधार्थी शशिकांत ने राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत काव्य पाठ किया।
कवि सलीम मज़हर ने अपनी ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात शोधार्थी अनन्या, अपराजिता, श्वेता एवं विधि ने अपनी काव्य प्रस्तुतियाँ दीं।
तत्पश्चात शुभांगी मिश्रा ने अपना काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर रचित अपनी कविता का पाठ किया। जावेद खान ने अपनी शायरी के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, जनआंदोलनों की भूमिका और ऐतिहासिक स्मृतियों को वर्तमान संदर्भ से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया। विशेष रूप से चौरी-चौरा आंदोलन से जुड़ी उनकी कविता ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. निधि चतुर्वेदी जी ने सभी वक्ताओं, कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर विभाग की डॉ. श्वेता, डॉ. सुनीता, डॉ. आशीष कुमार सिंह सहित मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के सभी शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम का वातावरण जीवंत, विचारोत्तेजक एवं प्रेरणादायी बना रहा।
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